Shuddha Jeevan Jeene ke Mantra (hindi)


Price: ₹ 151.00
(as of Sep 25,2021 19:12:32 UTC – Details)


आध्यात्मिक मूल्यों से रहित जीवन कुछ ऐसा ही है, मानो हम कोई अनाथ बालक हों; हम स्वयं को असुरक्षित, प्रेम से रहित तथा अवांछित मान बैठते हैं। मूल्य हमारे ‘माता-पिता’ हैं। मनुष्य की आत्मा इसके द्वारा पोषित मूल्यों से सिंचित होती है। जब हम अपने मूल्यों के अनुसार जीते हैं तो इससे एक सुरक्षा व सहजता का भाव उपस्थित होता है। मूल्य हमें स्वतंत्रता और आजादी देते हैं, आत्मनिर्भर बनने की क्षमता प्रदान करते हुए बाहरी प्रभावों से मुक्त करते हैं। आत्मा के भीतर सत्य को जानने तथा सत्य के पथ का अनुसरण करने की योग्यता विकसित होती है। मूल्य व्यक्ति के हृदय के बंद द्वार खोलकर मनुष्य की प्रकृति को रूपांतरित कर देते हैं, ताकि उसका जीवन करुणा एवं विनय से ओत-प्रोत हो जाए। जब व्यक्ति अपने भीतर मूल्यों को विकसित कर लेता है तो अपने आसपास के संसारों में भी उन मूल्यों की महक फैला देता है, ताकि सभी एक बेहतर जगत् की ओर आगे बढ़ सकें। शुद्ध-सात्विक भाव से जनकल्याण एवं मानवहितार्थ सेवारत ब्रह्माकुमारियों के प्रेरक जीवन से उपजे ‘शुद्ध जीवन जीने के मंत्र’ जो हर पाठक के हृदय को आध्यात्मिक आनंद से समृद्ध कर देंगे|



From the Publisher

SHUDDHA JEEVAN JEENE KE MANTRA by BRAHMA KUMARIS

SHUDDHA JEEVAN JEENE KE MANTRA by BRAHMA KUMARISSHUDDHA JEEVAN JEENE KE MANTRA by BRAHMA KUMARIS

The Brahma Kumaris teach that souls enter bodies to take birth in order to experience life and give expression to their personality

ब्रह्माकुमारीज़ महिलाओं द्वारा चलाई जाने वाली विश्व में सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था है। इस संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने माताओं और बहनों को शुरू से ही आगे रखने का फैसला लिया और इसी के कारण विश्व की अन्य सभी आध्यात्मिक और धार्मिक संस्थानों के बीच में ब्रह्माकुमारीज़ अपना अलग अस्तित्व बनाये हुए है। पिछले 80 वर्षों से इनके नेतृत्व ने लगातार हिम्मत, क्षमा करने की क्षमता और एकता के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता को साबित किया है।

हालांकि सभी शीर्ष व्यवस्थापकीय पदों पर महिलायें नेतृत्व करती हैं लेकिन यह शीर्ष की महिलायें हमेशा अपने निर्णय भाईयों के साथ मिलजुल कर लेती हैं। यह सहभागिता और आम सहमति के साथ नेतृत्व का एक आदर्श है जो सम्मान, समानता और नम्रता पर पर आधारित है। यह एक कुशल और सामंजस्यपूर्ण अधिकारों के उपयोग का उदाहरण रूप है।

ब्रह्माकुमारीज़ की मूल शिक्षाएँ एवं सिद्धांत आत्मा और तत्वों के बीच के आपसी संबंध की वास्तविक समझ प्रदान करता है | साथ-ही-साथ आत्मा, परमात्मा और भौतिक विश्व के बीच परस्पर सम्बन्ध की समझ भी दी जाती है |

चेतना और आत्म अनुभूतिपरमात्मा के साथ सम्बन्ध और समीपताकर्म के सिद्धान्तसमय चक्रजीवन रूपी वृक्षआध्यात्मिक जीवनशैली

दादी जानकी जी का जन्म सन 1916 में हुआ और इस समय वे ब्रह्माकुमारीज़ विश्व विद्यालय की मुख्य प्रशासिका के रूप में सेवारत हैं। अपनी अचल प्रतिबद्धता के साथ अनेकों की सेवा करते हुए वो अपने आपको किसी भी प्रकार के सीमा में बांधना पसन्द नहीं करती। इस संस्था के साथ वो 1937 से जुड़ी और लण्डन में 1974 से आज तक 40 वर्ष का समय आपने बिताया। विभिन्न संस्कृति और व्यवसाय के लोगों को उन्होंने अपने जीवन से प्रेरित किया और उनमें बेहतर विश्व निर्माण के लिए अपने जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाकर सहयोगी बनाया। उनकी ज्ञानयुक्त गहरी और व्यावहारिक बातों को सुनना और देखना अभूतपूर्व आनन्द के क्षण होते हैं।

________________________________________________________________________________________________________________________________________

The Brahma Kumaris are a spiritual movement that originated in Hyderabad, Sindh, during the 1930s. The Brahma Kumaris (Sanskrit: ब्रह्माकुमारी, “Daughters of Brahma” movement was founded by Lekhraj Kripalani. The organisation is affiliated with the United Nations and is known for the prominent role that women play in the movement.

It teaches a form of meditation that focuses on identity as souls, as opposed to bodies. They believe that all souls are intrinsically good and that God is the source of all goodness. The organisation teaches to transcend labels associated with the body, such as race, nationality, religion, and gender, and it aspires to establish a global culture based on what it calls “soul-consciousness”.

In 2008, the movement claimed to have more than 825,000 regular students, with over 8,500 centres in 100 countries

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *