Samanya Adhyayan – Prashnapatra I 2021 | Civil Seva Prarambhik Pariksha Hetu Ek Safal Margdarshika


Price: ₹ 805.00
(as of Sep 23,2021 06:18:16 UTC – Details)


प्रस्तुत पुस्तक के इस संशोधित एवं परिवर्द्धित संस्करण में सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र को आधार बनाया गया है जिसके अंतर्गत सभी विषयों को सारगर्भित एवं पूर्ण विश्लेषणात्मक स्वरुप में प्रस्तुत करने के क्रम में उन्हें कम शब्दों में प्रस्तुत करने हेतु चरणबद्ध तरीके से माइंड मैप्स, फ्लो चार्ट्स, टेबल्स एवं बुलेट आदि का सहारा लिया गया है ताकि विषयवस्तु आकर्षण का केंद्र बने एवं अभ्यर्थी पढ़ने हेतु आकर्षित हों तथा उनके लिए कम शब्दों में अधिक विषयवस्तुओं को प्रस्तुत किया जा सके। साथ हीं इसके अंतर्गत यह भी ख्याल रखा गया है कि यह पुस्तक एक वैसी सार संग्रहिका की तरह कारगर साबित हो जिसमें एक मौलिक ग्रन्थ के वे सभी गुण मौजूद हों जो अभ्यर्थियों को सफल बनाने हेतु जरुरी हैं जैसे मौलिक तथ्यों की गुणवत्ता, कम से कम शब्दों में विषय – वस्तुओं को समझाने की क्षमता,वर्तमान प्रश्नपत्रों के अनुरूप विषय वस्तुओं का व्यवस्थापन एवं वर्तमान प्रश्नपत्रों के अनुरूप हीं मॉडल प्रश्नपत्रों का समावेश आदि। उपर्युक्त विषयवस्तुओं के लेखन में देश के उन ख्याति प्राप्त विशेषज्ञों का सहयोग लिया गया है जिनकी दूरदर्शिता एवं ओजस्विता तो जगजाहिर है तथा साथ हीं जिनकी लेखन शैली के उच्च प्रतिमानों ने सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के बीच अपनी पैठ बना रखी है।

प्रमुख विशेषताऐं:

अद्यतन सामग्री के साथ प्रश्नपत्र I के लिए यूपीएससी सिविल सर्विसेज एवं राज्य लोक सेवा आयोगों के नवीन पाठ्यक्रम का एक पूर्ण और व्यापक कवरेज

प्रत्येक अध्याय में सभी मौलिक एवं परीक्षोपयोगी तथ्यों को प्रस्तुत करने के क्रम में चरणबद्ध तरीके से माइंड मैप्स, फ्लो चार्ट्स, टेबल्स एवं बुलेट आदि का सहारा लिया गया है

भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन तथा भौतिकी नामक विषय में नवीन विषयवस्तु की प्रस्तुति प्रासंगिक जो समकालीन उभरते रुझानों के अनुरूप है

समसामयिक विषयों पर विशेष बल जैसे कोरोना वायरस की महामारी, नागरिकता संशोधन अधिनियम, सूचना का अधिकार (संशोधन) अधिनियम 2019, बहुऔषध-प्रतिरोधक तपेदिक आदि

सत्यापित आंकड़ों तथा तथ्यों का परिमार्जन कर उसे परीक्षोपयोगी बनाना हमारा मुख्य लक्ष्य

लेखन शैली एवं अभ्यर्थियों को समझाने में सहज, सरल एवं सुबोध भाषा शैली का प्रयोग</br>.

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