प्राचीन भारत का इतिहास (वस्तुनिष्ठ) : An objective history ( in Hindi) book Specially for UPSC, PSC, Railway, SSC, CBSE NET, And other competetion exam. … Bharat ka itihas bhag -1) (Hindi Edition)


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(as of May 14,2021 08:20:20 UTC – Details)


IAS, BPSC , MPPSC, HPSC, UPPSC, prarambhik pariksha , NET, SSC, aur anya pratiyogita pariksha ke liye prachin bhartiy itihas ki vashtunishth pustak. पुस्तक की विशेषताएं:
1. प्रस्तुत पुस्तक "इतिहास वस्तुनिष्ठ भाग-1" में आरम्भ से लेकर 740 ईस्वी तक के इतिहास को अवधारणात्मक वस्तुनिष्ठ शैली में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। कुल 16 अध्यायों में प्रस्तुत उपरोक्त पुस्तक में उच्च कोटि के वस्तुनिष्ठ प्रश्न शामिल किए गए हैं ताकि कोई भी महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाए।
2. उपरोक्त पुस्तक में पूछे जानेवाले प्रश्न का स्तर सामान्यतया काफी ऊंचा रखा गया है। उन प्रश्नों को या तथ्यों को सामान्यतया इस पुस्तक में शामिल करने से बचने का प्रयास किया गया है जो " अधिकांश लोगों को स्वतः पता है और सामान्यतया प्रतियोगिता परीक्षाओं में 70 से 90% छात्र सही उत्तर हीं देते हैं।" जैसे उदाहरण के लिए "सबसे पुराना वेद कौन सा है? स्वाभाविक है कि अधिकांश लोग इसका सही उत्तर जानते हों।
3. प्रस्तुत पुस्तक में प्रश्नों के विश्लेषणात्मक एवं तथ्यात्मक प्रश्नों में समन्वय तो स्थापित किया हीं गया है साथ हीं यह ‘ निर्णयन ‘ कौशल के विकास में भी सहायक होगी।
4. प्रस्तुत पुस्तक का उपयोग छात्र न सिर्फ तैयारी के लिए कर सकते हैं वरण समय – समय पर अपनी तैयारी के स्तर को जानने के लिए भी इसका उपयोग कर सकते हैं।
5. चूंकि प्रस्तुत पुस्तक हिंदी माध्यम में है और हाल के दिनों में देखा गया है कि पूछे गए प्रश्न के तकनीकी शब्द की ‘ हिंदी वर्तनी को बिल्कुल वैसा नहीं लिखा जाता जैसा कि सामान्य हिंदी भाषी जानता हो वरण इसके बदले क्लिष्ट हिंदी शब्द या तकनीकी शब्द दे दिया जाता है। प्रस्तुत पुस्तक में शब्द को इसी रूप में लिखा गया है ताकि भविष्य में परीक्षा में ‘ अचंभित’ न होना पड़े।
6. इस पुस्तक में सामान्यतया ‘ नए एवं विशिष्ट प्रश्न ‘ शामिल किए गए न कि बार बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न की प्रकृति: सामान्य/ कठिन / अति कठिन रखा गया है।

विषय सूची
अतिमहत्वपूर्ण स्मरणीय तथ्य
1. भारतीय इतिहास की भौगोलिक पृष्टभूमि
2. प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत
3. प्राक इतिहास
4. आद्य इतिहास
5. भारत वैदिक साहित्य के दृष्टिकोण से।
6. छठी शदी ईस्वी पूर्व में भारत।
7. महाजनपदों का उदय एवं भारत पर प्रथम विदेशी आक्रमण।
8. मौर्य युग
9. मौर्योत्तर युग
10. सुदूर दक्षिण का आरम्भिक इतिहास एवं संगम साहित्य
11. उत्तरी भारत का राजनीतिक इतिहास ( 300 से 650 ई.)
12. उत्तर भारत का आर्थिक एवं प्रशासनिक इतिहास ( 300 से 650 ई.)
13. उत्तर भारत का सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक इतिहास(300 से 650 ई.)
14. गुप्तोत्तर कालीन भारत की राजनीति
15. गुप्तोत्तर कालीन भारत समाज एवं अर्थव्यवस्था।
16. गुप्तोत्तर कालीन भारत का सांस्कृतिक इतिहास।
पुस्तक के तृतीय संस्करण की भूमिका
पुस्तक का नया संस्करण आपके समक्ष प्रस्तुत कर अपार सुख महसूस कर रहा हूँ। आप तमाम पाठकों व् सिविल सेवा प्रतियोगियों के सुझाव पर इस संस्करण में कुछ महत्वपूर्ण एवं आवश्यक बदलाव किये गए हैं
1 . अध्याय 17 में आरम्भिक मध्युगीन अर्थव्यवस्था से सम्बंधित प्रश्नो को सम्मिलित करने के उपरांत इस पुस्तक में अब कुल सत्रह अध्याय हैं।
2. पुस्तक में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश किया गया है, जो इतिहास की सामयिक व्याख्या एवं तथ्यों के संग्रह से प्राप्त हुए हैं।
3 . पुस्तक के आरम्भ में ही पुस्तक उपयोग का तरीका बताया गया है जो अभ्यर्थियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
अंत में मेरे प्रयास के बावजूद भी अगर कोई तथ्य छूट जाता है या उसमें त्रुटि रह जाती है तो इसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।
-मोहन कुमार
पुस्तक उपयोग का तरीका
सबसे पहले अपने तैयारी को अंतिम रूप दें। फिर इस पुस्तक के आरम्भ में दिए गए परीक्षोपयोगी और महत्वपूर्ण तथ्यों को आत्मसात करें। तत्पश्चात आप इस पुस्तक के प्रश्नों को प्रथम बार प्रयास कर सकते हैं। पहले प्रयास में सम्भव है कि आपका प्रदर्शन 40 प्रतिशत या उससे भी नीचे रहे किन्तु तनिक भी विचलित होने की आवश्यकता नहीं है।
प्रस्तुत पुस्तक का उपयोग आप कैसे करें ?
इस पुस्तक का उपयोग सदैव टेस्ट सीरीज के रूप में ही करें। एक दिन में अधिकतम एक सीरीज/ चैप्टर के सभी प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें और हल करने की अपनी इस प्रक्रिया को निरंतर दुहराएँ जबतक की आपका औसत स्कोर प्रति टेस्ट 85-90 % न पहुँच जाये।
सिविल सेवा प्रतियोगिओं को सदैव जागरूक, इच्छुक एवं तटस्थ होना चाहिए। हो सकता है की पहले प्रयास में यह पुस्तक आपको नीरस लगे किन्तु ध्यान रहे कि जो चीजें आसान होती है वो सबकी पहुँच में होती है।

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